Toilet soap & Bathing soap difference in hindi

Soap हमारी दैनिक दिनचर्या का एक अहम हिस्सा है। क्योंकि अधिकतर सभी लोग soap का इस्तेमाल अवश्य करते है। लेकिन soap खरीदते समय हम TFM की जांच नही करते। क्योकि हमे TFM के बारे में पता ही नही होता होता है।
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साबुन 

हम लोग तो इन कंपनियों पर भरोसा करकर, इनके उत्पाद को खरीदते है। हमे क्या पता, कि इन्हें बनाने में किन चीजों का इस्तेमाल होता है। कुछ लोग अपना नहाने का साबुन खुशबू और विज्ञापन देखकर चुनते है।

TFM क्या होता है

TFM (Total Fatty Material) एक वसीय अम्ल होता है। साबुन में TFM की मात्रा जीतनी अधिक होगी। साबुन उतनी अछि गुणवत्ता वाला होता है। आपके soap में जितनी काम TFM की मात्रा होगी। वह आपके परिवार के लिए बिल्कुल सही नही है।

TFM की मात्रा

भारत मे साबुन को मुख्यतः 2 श्रेणियों में बांटा गया है Bathing soap, Toilet soap

  • अगर आपके soap में 60 से 76% TFM है तो यह एक Toilet soap है।
  • TFM 76% से अधिक हो, तो Bathing soap है।

Tallow

इसे जानवरो की चर्बी से निकाला जाता है। इसका प्रयोग कुछ ही soaps में किया जाता है। Tallow कंपनियों को काफी सस्ता पड़ता है और आसानी से उपलब्ध है। इसलिए जब भी आप साबुन खरीदे Tallow और TFM की जांच अवश्य करे।

Toilets soap Name

मैं ऐसे सिर्फ 2 साबुनों के बारे में बताऊंगा, जो भारत मे काफी लोकप्रिय है और जिनका प्रयोग हम Bathing soap के तौर पर करते है उनका नाम है - Dettol, Lifebuoyअमेरिका में Lifebuoy का प्रयोग जानवरो के नहलाने के लिए किया जाता है और भारत मे इससे इंसान नहाते है।

Bathing soap

कुछ गिने-चुने soaps का नाम लूंगा। जिनमे TFM की मात्रा अधिक होने के कारण उनकी गुणवत्ता अच्छी है। Johnson's,Dove,Pears,Doy

आप चाहे तो आयुर्वेदिक साबुन का प्रयोग कर सकते है। अगर घरेलू नुस्खे की बात करे तो आप दूध दही को मिलाकर इससे नहाए। इस करने से आपकी त्वचा चमकदार, गोरी और सुंदर होती है और त्वचा संबंधी रोग भी नही होते, शरीर की सारी मैल भी उतर जाती है।

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