आयुर्वेद दवाई/औषधि के साथ क्या परहेज करना चाहिए।

लोगो के मन मे कई बार यह सवाल आता है कि आयुर्वेदिक दवाई/औषधि के साथ क्या परहेज करना चाहिए ? आयुर्वेद दवाई की खास बात यह है कि इसमें आपको कोई परहेज करने की जरूरत नही है। लेकिन कुछ बीमारियों में परहेज की आवश्यकता होती है।

कृपया करके इस post को पूरा पढ़े, ताकि आपको सही से सब समझ में आ सके।


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Ayurvedic medicine 


आयुर्वेदिक दवाई/औषधि का रिएक्शन करना

आज के समय मे बाहरी दवाइयों के इस्तेमाल से हमारा शरीर उसका आदि हो चुका है। आज के इस दौर में बाहरी दवाइयों का प्रचलन इतना बढ़ गया है कि हल्का-सा सिर दर्द या जुकाम होने पर भी हम इन दवाइयों का प्रयोग करते है।

लेकिन अब लोगो मे जागरूकता देखने को मिलती है। वे बाहरी दवाइयों का प्रयोग कम करके आयुर्वेदिक औषधियों को अपना रहे है।

समस्या यह है कि आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां कुछ लोगो को सूट नही करती है। अब इसका भी समाधान हमारे पास है।

1.) गौ मूत्र, जी हाँ अगर आपको आयुर्वेदिक औषधियां रिएक्शन करती है तो आप रोज सुबह खाली पेट 2 चम्मच गौ मूत्र का सेवन करे। इस आपको 1-2 महीने तक करना है। गौ-मूत्र के सेवन से शरीर मे उपयुक्त सभी तरह के विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते है जिससे आपका शरीर गंगाजल के समान स्वछ व पवित्र हो जाता है। इसके बाद आप आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन कर पाएंगे।

2.) अगर आप आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग पाउडर के रूप में करते है और आपको इसके अच्छे प्रभाव के स्थान पर किसी भी तरह के दुष्प्रभाव देखने को मिलते है। तब आपको इसका सेवन रोज करने की बजाए 3 - 4 दिनों में एक बार करना चाहिए, इसकी मात्रा भी कम कर दें। धीरे-धीरे इसके दुष्प्रभाव कम होकर अच्छे प्रभाव देखने को मिलेंगे।

3.) स्किन रिएक्शन से बचने के लिए पहले आयुर्वेदिक दवाई/औषधि को अपने हाथ पर लगाए। अगर हाथ पर जलन, बारीक दाने, खाज या स्किन लाल हो जाती है। तो उस दवाई/औषधि का प्रयोग न करें।

वैसे तो आयुर्वेद में हमे किसी तरह के परहेज की आवश्यकता नही होती है। लेकिन किसी विशेष/बड़ी बीमारिमे कुछ परहेज करने पड़ सकते है। इसलिए किसीभी आयुर्वेदिक दवाई का प्रयोग करते समय एक अच्छे वैद्य की सलाह जरूर लें।

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